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बालगोबिन भगत नोट्स

 सार बालगोबिन भगत मंझोले कद के गोर-चिट्टे आदमी थे। उनकी उम्र साठ वर्ष से उपर थी और बाल पक गए थे। वे लम्बी ढाढ़ी नही रखते थे और कपडे बिल्कुल कम पहनते थे। कमर में लंगोटी पहनते और सिर पर कबीरपंथियों की सी कनफटी टोपी। सर्दियों में ऊपर से कम्बल ओढ़ लेते। वे गृहस्थ होते हुई भी सही मायनों में साधू थे। माथे पर रामानंदी चन्दन का टीका और गले में तुलसी की जड़ों की बेडौल माला पहने रहते। उनका एक बेटा और पतोहू थे। वे कबीर को साहब मानते थे। किसी दूसरे की चीज़ नहीं छूटे और न बिना वजह झगड़ा करते। उनके पास खेती बाड़ी थी तथा साफ-सुथरा मकान था। खेत से जो भी उपज होती, उसे पहले सिर पर लादकर कबीरपंथी मठ ले जाते और प्रसाद स्वरुप जो भी मिलता उसी से गुजर बसर करते। वे कबीर के पद का बहुत मधुर गायन करते। आषाढ़ के दिनों में जब समूचा गाँव खेतों में काम कर रहा होता तब बालगोबिन पूरा शरीर कीचड़ में लपेटे खेत में रोपनी करते हुए अपने मधुर गानों को गाते। भादो की अंधियारी में उनकी खंजरी बजती थी, जब सारा संसार सोया होता तब उनका संगीत जागता था। कार्तिक मास में उनकी प्रभातियाँ शुरू हो जातीं। वे अहले सुबह नदी-स्नान को जाते...

स्ववृत्त लेखन

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  स्ववृत्त का अर्थ एवं स्वरूप निजी जीवन एवं व्यक्तित्व से संबंधित महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी सूचनाएँ देना स्ववृत्त लेखन कहलाता है। नौकरी या छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र लिखते समय , विवाह के लिए अथवा किसी विशेष प्रयोजन , जैसे , किसी पुरस्कार या पदोन्नति आदि के लिए नामांकन पत्र भरते समय स्ववृत्त देने की आवश्यकता होती है। स्ववृत्त वास्तव में अपनी निजी , शैक्षिणिक , कार्य संबंधी एवं इतर योग्यताओं का संक्षिप्त लेखा-जोखा होता है।   स्ववृत्त लिखते समय निम्नलिखित बातों विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि सभी जानकारी स्पष्ट रूप से उसमें आ जाएँ- नाम – सर्वप्रथम साफ अक्षरों में अपना पूरा नाम देखा जाता है। जन्म-तिथि – जन्म-तिथि स्ववृत्त का महत्त्वपूर्ण अंग है। कई बार किसी कार्य के लिए आयु सीमा निर्धारित होती है , तो उसकी पुष्टि के लिए जन्म-तिथि देना अनिवार्य होता है। अन्यथा भी आयु से किसी के अनुभव एवं कार्य करने की क्षमता को आंका जा सकता है। अत: सही जन्म-तिथि देना महत्त्वपूर्ण होता है। माता-पिता का नाम – यदि पिता और/या म...